सुधी पाठकों ! वेद-सार में संस्कृत में लिखे मंत्र वेदों और वेदों पर आधारित पुस्तकों से लिए गए हैं .फिर भी ट्रांस लिट्रेसन के कारण छोटी मोटी त्रुटि संभव है . वेद मन्त्रों के अर्थ संस्कृत के बड़े बड़े विद्वानों द्वारा किये गए अर्थ का ही अंग्रेजीकरण है . हिंदी की कविता मेरा अपना भाव है जो शब्दशः अनुवाद न होकर काव्यात्मक रूप से किया गया भावानुवाद है . इस लिए पाठक इस ब्लॉग को ज्ञान वर्धन का साधन मानकर ही आस्वादन करें . हार्दिक स्वागत और धन्यवाद .



Wednesday, September 22, 2010

ऋतु वर्णन

ओम् वसन्त इन्नु रन्त्यो ग्रीष्म  इन्नु रन्त्य: ।
वर्षाण्यनु शरदो हेमन्त शिशिर इन्नु रन्त्य: ।।
सामवेद ६/३/४/२
Oh God ! By thy grace all seasons may be favourable and delightful for us. Spring may be very pleasent followed by a shiny summer season. Rains come after that with its water as the blessing for the earth . Other seasons like winter and autmn be enjoyable to us.
सुन्दर ! है सुन्दर ! जीवन की हर ऋतु सुन्दर !
सुन्दरतम सबसे है वसंत , पृथ्वी खिल उठती है अनंत 
फिर ग्रीष्म ऋतु जब आती है , जीवों में शक्ति लाती है !
फिर वर्षा की आती फुहार, खुशबू से भर जाती बयार 
फिर शरद ऋतु आती न्यारी, खिल उठती है बगिया प्यारी !
ईश्वर की कृपा बरसती है , ऐसे प्रकृति सरसती है 
आते हैं फिर हेमंत शिशिर , वसुधा पर है खुशहाली चिर !  
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1 comment:

  1. Excellent Description and poetry. I have learnt it for reciting several times. Thanks and keep creating

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